
बौद्धाचार्य शांति स्वरूप बौद्ध जी
संस्थापक, सम्यक प्रकाशन, नई दिल्ली
सम्यक प्रकाशन के संस्थापक। बौद्ध व बहुजन साहित्य के प्रमुख प्रकाशक। साहित्य, धम्म और सामाजिक जागरण को जोड़ने वाले वक्ता।
प्रथम वर्ष · बहुजन मुक्ति दिवस
गौतम बुद्ध नगर की धरती पर 25 दिसंबर के ऐतिहासिक सफर की विधिवत शुरुआत वर्ष 2015 से हुई। बहुजन मुक्ति दिवस के रूप में आयोजित यह प्रथम आयोजन 10,000 से अधिक लोगों की उपस्थिति के साथ सफल रहा और इसने सामाजिक जागरूकता, धम्म विचार तथा सामूहिक सहभागिता के साथ बौद्ध महोत्सव की मजबूत नींव रखी, जिस पर आगे के वर्षों में इस यात्रा का निरंतर विस्तार हुआ।
वर्ष 2015 के आयोजक मंडल के सदस्य एवं उनके दायित्व


















संस्थापक, सम्यक प्रकाशन, नई दिल्ली
सम्यक प्रकाशन के संस्थापक। बौद्ध व बहुजन साहित्य के प्रमुख प्रकाशक। साहित्य, धम्म और सामाजिक जागरण को जोड़ने वाले वक्ता।

प्रोफेसर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
बी.एच.यू. की प्रोफेसर। शिक्षा, समाज और धम्म से जुड़े विषयों पर गहन वक्तव्य। शैक्षिक दृष्टि से आयोजन को समृद्ध करने वाली वक्ता।

वाइस प्रेसिडेंट, बी.एस.ई.एस., नई दिल्ली
बी.एस.ई.एस. में वरिष्ठ पद। सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय। प्रशासनिक अनुभव के साथ जन-मंच पर प्रभावी उपस्थिति।

धम्म प्रचारक, ग्राम सिहानी, गाजियाबाद
धम्म प्रचारक। बुद्ध के उपदेशों को सरल, जन-भाषा में पहुँचाने वाले वक्ता। क्षेत्रीय समुदाय से गहरे जुड़ाव के साथ प्रवचन।
नई दिल्ली
हेमंत बौद्ध जी, तरन्नुम बौद्ध जी
दयानतपुर, जेवर
मोरध्वज गौतम, त्रिशला गौतम, चोखेलाल गौतम, धनुष पाल गौतम
जेवर
ताराचंद पेंटर जी
बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर एवं गांधी जी तथा कांग्रेस के अन्य नेताओं के मध्य पुणे की येरवडा जेल में हुए समझौते का जीवंत मंचन — आयोजन का सबसे यादगार क्षण।
प्रतिभागी: डालचंद गौतम, प्रवीण मिलिंद, सुशील प्रेमी, योगेश चित्रसेन, कपिल प्रेमी, चंचल गौतम, अजीत गौतम तथा भीम ज्ञान चर्चा से जुड़े छात्र-छात्राएँ।
संचालन: आदरणीय बृजभूषण मास्टर जी, दादरी।
बुद्ध धम्म की क्या पहचान? मानव-मानव एक समान! भीम दूत आए हैं, भीम संदेशा लाये हैं भीम तरंगे आई हैं, नई रोशनी लाई हैं
प्रचार-प्रसार के दौरान प्रयास था कि हर व्यक्ति को बिना अतिरिक्त प्रयास के भोजन मिले। समिति की बैठक में स्वयं की किचन व्यवस्था का सुझाव था; अंत में डॉ. अंबेडकर हॉस्टल, ग्रेटर नोएडा के मेस के माध्यम से भोजन व्यवस्था की गई।
वास्तविक उपस्थिति 10,000 से अधिक रही। बीच में खाना बंद रहा, असुविधा हुई। टीम संतुष्ट नहीं रही।
सबक: अगले वर्ष से स्वयं की हलवाई वाली व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया।
अनौपचारिक रूप से तीन-चार महीने पहले प्रचार शुरू हुआ। सूरजपाल एडवोकेट जी को 2 महीने के लिए पूर्णकालिक प्रचारक बनाया गया। विशेष योगदान: विनोद बौद्ध जी, योगेश चित्रसेन जी, डालचंद गौतम जी, सुशील प्रेमी जी, के.पी. सिंह जी एवं संघमित्रा गौतम जी।
10,000 से अधिक लोग शामिल हुए। क्षेत्र की जनता का भरपूर प्यार प्राप्त हुआ।
“जब शुरुआती बैठकें हो रही थीं तब आदरणीय रमेश गौतम जी ने टीम को 2000 लोगों का टारगेट दिया था। उन्होंने कहा था — यदि तुम 1500 लोग भी इकट्ठा कर लेते हो तो सफल माने जाओगे।”
प्रचार टीम को पहले से अंदाजा था कि 10,000 से अधिक आएंगे; दो दिन पहले समिति को बताया गया, पर तब यकीन नहीं हुआ था।
अमृता टेंट एंड डेकोरेशन के संचालक श्रद्धेय नरेश गौतम जी द्वारा सुंदर पंडाल। पहली बार दलित समाज के धार्मिक-सांस्कृतिक प्रोग्राम में ट्रस के पिलर वाला मंच, शानदार सोफे, कवर कुर्सियाँ, कारपेटिंग और आकर्षक मुख्य द्वार।
विशेष: सफलता के बाद नरेश गौतम जी स्वयं आयोजन समिति के सदस्य बने; कई बार अध्यक्ष भी रहे। बौद्ध महोत्सव की सफलता में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
देवेंद्र साउंड, दयानतपुर, जेवर
बहुजन साहित्य की 20–25 स्टॉल
ज्ञान प्रकाश जी (सूरजपुर) की टीम — परी चौक व गोल चक्कर भी कवर
भगवान बुद्ध और बाबासाहेब की पीतल की मूर्तियाँ मुख्य द्वार पर; गुलाब के फूल
परी चौक व गोल चक्करों पर पंचशील झंडे और डायरेक्शन बोर्ड
पोस्टर/अपील: संदीप बौद्ध जी (सम्यक प्रकाशन)
फ्लेक्स/बैनर: योगेश चित्रसेन जी
वाहन पार्किंग, भोजन आदि के लिए 100 युवक-युवतियों को वॉलिंटियर बनाया गया। 15 वॉलिंटियरों को वॉकी-टॉकी दिए गए — गेट, ग्राउंड, पार्किंग और मंच के बीच तालमेल। मंच संचालक उनके संदेश अनाउंस करते थे। चाक-चौबंद अनुशासित व्यवस्था।
समिति के समक्ष चुनौती थी — गरीब और मेहनतकश लोगों को आयोजन तक पहुँचाना। ग्रामीण क्षेत्र के लिए कलेक्शन बुक छपवाई गई, ताकि गाँव स्तर पर बस का खर्च व्यवस्थित हो सके।
“ग्रेटर नोएडा बहुत धनी शहर है और यहाँ हमारे लोगों ने संपूर्ण खर्च वहन किया है। आपको दान देने की आवश्यकता नहीं; बस अपने गाँव से एकत्रित राशि बस के किराए पर खर्च कर महिलाओं और बच्चों के साथ सुरक्षित पहुँचें।”
सैकड़ों गाँव से लोग सामूहिक बस लेकर आए। महिलाओं और बच्चों की भागीदारी लगभग 60% हो गई — आंदोलन के हित में गर्व की बात। यह आगे के वर्षों के लिए ट्रेंड बन गया।
जिन गाँवों से बस बुक हुई, वहाँ पंचशील के झंडे और गले के पटके पहुँचाए गए। लोग झंडे लेकर नारे लगाते हुए शामिल हुए — बुद्ध धम्म की क्या पहचान? मानव-मानव एक समान!
वर्ष 2015 का यह प्रथम आयोजन — बहुजन मुक्ति दिवस — गौतम बुद्ध नगर में 25 दिसंबर की परंपरा की नींव बना। जन-सहयोग, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, धम्म देशना और बड़ी जन-उपस्थिति के साथ यह उत्सव सफल रहा।
इसी नींव पर आगे के वर्षों में बौद्ध महोत्सव का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण वार्षिक आयोजन बन गया।
इस वर्ष से संबंधित प्रकाशित तस्वीरें और वीडियो केंद्रीय BGCA Media Library से अपने-आप यहाँ दिखाई देंगे।